नवरात्रि व्रत कथा (Navratri Vrat Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि का व्रत रखने और कथा सुनने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यहाँ सबसे प्रचलित कथा दी गई है:
महिषासुर मर्दिनी कथा: प्राचीन काल में ‘महिषासुर’ नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था, जिसने ब्रह्मा जी की तपस्या कर अमर होने जैसा वरदान प्राप्त कर लिया था। उसे वरदान था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे मार नहीं पाएगा, केवल एक स्त्री ही उसका अंत कर सकेगी।
शक्ति पाकर उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को वहां से निकाल दिया। तब सभी देवता भगवान विष्णु और शिव जी के पास मदद के लिए गए। देवताओं के क्रोध और तेज से एक दिव्य देवी प्रकट हुईं, जिन्हें माँ दुर्गा कहा गया। देवी को सभी देवताओं ने अपने विशेष अस्त्र-शस्त्र दिए।
देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच 9 दिनों तक भीषण युद्ध चला। अंत में 10वें दिन माता ने महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्त कराया। इसी विजय की खुशी में नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
माँ दुर्गा की आरती (Maa Durga Aarti)
पूजा के अंत में आरती करना अनिवार्य है ताकि पूजा में हुई किसी भी चूक के लिए क्षमा मिल सके और मनोकामना पूरी हो।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रबदन नीको॥ जय अम्बे…
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ जय अम्बे…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ जय अम्बे…
शम्भु निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। भवभय भंजनि माता, सब कष्ट हरे॥ जय अम्बे…
अष्टकोण की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥ जय अम्बे…
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