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Ab ke navrat mere angna padharo lyrics hindi 2026

Ab ke navrat mere angna padharo lyrics hindi
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अब के नवरात मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी: लिरिक्स और भावार्थ Ab ke navrat mere angna padharo

शारदीय हो या चैत्र नवरात्रि, माता दुर्गा की भक्ति में डूबे भक्तों के लिए भजन ही शक्ति का स्रोत होते हैं। प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह ‘लख्खा’ द्वारा गाया गया भजन “अब के नवरात मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी” एक ऐसी ही अनुपम कृति है। इस भजन में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वे नौ दिनों तक उसके घर में विराजमान होकर उसके दुखों का अंत करें।

भजन के बोल (Lyrics in Hindi)

अब के नवरात मेरे,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,
अंगना पधारो मेरे संकट निवारो,
संकट निवारो मेरी बिगड़ी संवारो,
जगदम्बे भवानी,
अब के नवरात मेरें,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी…
पहली नवरात्रि मेरे,
पाप नाश करना,
दूसरी नवरात्री कष्ट,
संताप हरना,
तीसरी नवरात्री भरम,
मन के मिटाना,
चौथी नवरात्री मेरी,
किस्मत चमकना,
पांचवी नवरात्री दोष,
अवगुण बिसारो,
जगदम्बे भवानी,
अब के नवरात मेरें,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी…
छठी नवरात्री छुटकारा,
हो मोह जाल से,
सातवीं नवरात्री गाऊं,
महिमा सुरताल से,
अष्टमी को आना,
रूप अष्टभुजी धारकर,
नवमी को निष्काम,
भक्ति का देना वर,
तुम हो तारणहार मैया,
मेरी भी तारो,
जगदम्बे भवानी,
अब के नवरात मेरें,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी…
करती हो मैया सबकी,
पूरी मनोकामना,
‘लख्खा’ के दिल में तेरे,
दर्शन की भावना,
टूटे ना मेरे विश्वास,
की ये डोरी,
तरस कान मेरे,
सुनने को लोरी,
अपने सरल को बेटा,
कहके पुकारो,
जगदम्बे भवानी,
अब के नवरात मेरें,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी…
अब के नवरात मेरे,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,
अंगना पधारो मेरे संकट निवारो,
संकट निवारो मेरी बिगड़ी संवारो,
जगदम्बे भवानी,
अब के नवरात मेरें,
अंगना पधारो जगदम्बे भवानी

अंतरा 1 (प्रथम से पंचमी):

  • पहली नवरात्रि: पाप नाश करना।
  • दूसरी नवरात्रि: कष्ट और संताप हरना।
  • तीसरी नवरात्रि: मन के भ्रम मिटाना।
  • चौथी नवरात्रि: सोई हुई किस्मत चमकाना।
  • पांचवी नवरात्रि: दोष और अवगुणों को बिसारना (भुला देना)।

अंतरा 2 (षष्ठी से नवमी):

  • छठी नवरात्रि: मोह-जाल से छुटकारा पाना।
  • सातवीं नवरात्रि: सुर-ताल के साथ मां की महिमा गाना।
  • अष्टमी: मां का अष्टभुजी रूप में आगमन।
  • नवमी: निष्काम भक्ति का वरदान प्राप्त करना।

भजन का आध्यात्मिक महत्व

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह नवरात्रि के नौ स्वरूपों के प्रति समर्पण का मार्ग है। इसमें भक्त हर दिन के लिए माता से एक विशेष कृपा की याचना करता है।

  1. शुद्धिकरण: शुरुआत पापों के नाश और कष्टों के निवारण से होती है।
  2. मानसिक शांति: तीसरे और पांचवें दिन भक्त अपने भ्रम और अवगुणों को दूर करने की प्रार्थना करता है।
  3. मुक्ति और भक्ति: अंतिम दिनों में भक्त सांसारिक मोह को छोड़कर माता की निष्काम भक्ति में लीन होना चाहता है।

यह भी पढ़ें: यदि आप नवरात्रि की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइटinsighttimes.inपर जाएँ जहाँ आपको धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक जानकारी मिलेगी।


लखबीर सिंह ‘लख्खा’ की खास प्रस्तुति

इस भजन की लोकप्रियता का श्रेय लख्खा जी की गायकी को भी जाता है। उनकी आवाज में जो करुणा और पुकार है, वह सीधे मां के चरणों तक पहुँचती महसूस होती है। भजन के अंत में ‘लख्खा’ जी ने बड़े ही भावुक शब्दों में मां से खुद को “बेटा” कहकर पुकारने की विनती की है, जो हर भक्त के हृदय को छू लेती है।

लखबीर सिंह ‘लख्खा’ द्वारा गाया गया प्रसिद्ध देवी भजन ‘अब के नवरात मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी’ के लिरिक्स (Lyrics) और इसका आध्यात्मिक महत्व यहाँ पढ़ें। नवरात्रि 2026 विशेष। jai mata di

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